मुरमुरे नमकीन की वो यादें। कल आमला की साप्ताहिक बाजार में जाना हुआ। साप्ताहिक बाजार में अलग अलग तरह की ताजी हरी सब्जियों को खरीदा जा सकता है। कुछ व्यापारी और कुछ किसान भी स्वयं आकर इन साप्ताहिक बाजारों में ताजी सब्जियों को बेचने आते हैं। ऐसे ही घूमते घूमते एक दुकान पर, मेरी ही उम्र के एक व्यापारी को मुरमुरे नमकीन इत्यादि बेचते हुए देखा। अनायास ही खरीदने का मन हुआ। एक पैकेट मुरमुरे और कुछ नमकीन को घर के लिए खरीद लिया। लेकिन इन नमकीन और मुरमुरे के पैकेट के साथ ही बचपन की कुछ यादों को भी पॉलीथीन में बांध कर घर ले आया। बचपन में एक संयुक्त परिवार में रहने के कारण, गांव की किसी भी दुकान से कुछ भी खरीदने की जैसे मनाही सी रहा करती थी। गांव में किसी भी सामान को खरीदने से रोकने के लिए घर वालों के द्वारा हमारे बाल सुलभ मस्तिष्क में अच्छे एवं बुरे बच्चों की इमेज, दिन प्रतिदिन के प्रोपोगंडा द्वारा उकेर दी गई थी। अच्छे बच्चों जैसा बने रहने की नैतिक जिम्मेदारी भी हमारे कंधो पर आ गई थी, जिसे की हम पूरे बचपन भर अपने कंधों पर धोते रहे और हमेशा टॉफी इत्यादि जैसी लक्जरी चीजों ...