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Showing posts with the label रामधारी सिंह दिनकर

मैं मजदूर मुझे देवों की बस्ती से क्या ?

आज शनिवार का दिन था। मैंने अपनी धर्म पत्नी के साथ सामान खरीदने के लिए बाजार का रुख किया।  सामान खरीदने के दौरान मुझको एक काका दिखाई दिए। काका मेरी कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूरी का काम करते हैं। मैंने ध्यान दिया कि काका ने कई प्रकार की दाले, खाना बनाने का तेल इत्यादि सामान खरीदे हुए थे।  कंस्ट्रक्शन कंपनियों में शनिवार का दिन अमूमन सैलरी डे के रूप में देखा जाता है। शनिवार के दिन, हफ्ते भर के हिसाब किताब का लेखा-जोखा होता है एवं हफ्ते भर की सैलरी मजदूरों को कैश के रूप में दी जाती है। मजदूरों के लिए शनिवार का दिन खुशियों को लेकर आता है। हफ्ते भर की थकावट को मिटाने के लिए कुछ मजदूर, मजदूरी के इन पैसों से नशे इत्यादि का सेवन भी कर लेते हैं और खैर घर का जरूरी सामान तो खरीदते ही हैं। नशा यहां पर इतनी गलत नजरों से नहीं देखा जाता है। ऐसा करना एक आम बात है।  काका को देखते ही मेरे दिमाग में कुछ ख्याल आने लगे। सरकारी विभागों में बनने वाली इन इमारतों से विभिन्न विभागों के लोग, भिन्न भिन्न कारणों से जुड़े हुए हैं। इन इमारतों का उपयोग करने वाले विभागों के लोग, जिनको की यूजर भी कहा जाता है,...